नयी दिल्ली: 11 सितंबर (ए) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने और द्विपक्षीय व्यापार, निवेश एवं ऊर्जा सहयोग बढ़ाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत करने के लिए तीन दिवसीय भारत यात्रा पर शुक्रवार को यहां पहुंचे।
पुतिन के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी नयी दिल्ली आया है। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार होगा जब पुतिन रूस के बाहर आयोजित किसी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्वयं भाग लेंगे। भारत की मेजबानी में शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं के क्षेत्रों में सामूहिक क्षमता मजबूत करने पर जोर दिए जाने की संभावना है। भारत का प्रयास है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने के लिए ब्रिक्स एक प्रभावी मंच साबित हो।
नयी दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की व्यापार एवं शुल्क नीतियों के प्रतिकूल प्रभावों से जूझ रही है।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग समेत कई शीर्ष नेता शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं.विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने हवाई अड्डे पर पुतिन की अगवानी की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रूस के नेता का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच बहुआयामी और पुराने मजबूत संबंध हैं जो विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं।पुतिन और मोदी के बीच विभिन्न मुद्दों पर शुक्रवार दोपहर व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होने का कार्यक्रम है।
बैठक में रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, औषधि और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल को उन्नत करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि रूस भारत को शेष एस-400 प्रणालियां देने के लिए प्रतिबद्ध है और सुखोई- 57 लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित आपूर्ति को लेकर भी बातचीत जारी है।
रूसी अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध मजबूत बने हुए हैं और भारत की नये असैन्य परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की योजना को लेकर भी दोनों पक्ष बातचीत करने पर विचार कर रहे हैं।
