आप के सात सांसदों ने पार्टी छोड़ी, स्थापना के 14 साल बाद सबसे बड़ा झटका

राष्ट्रीय
Spread the love

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (ए)) भारत में राजनीति की नीति और नीयत में क्रांतिकारी बदलावों के दावे के साथ करीब 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी (आप) के लिए गंभीर संकट पैदा हो गया है क्योंकि शुक्रवार को उसके सात राज्यसभा सदस्यों ने उसकी चिर प्रतिद्वंदी पार्टी भाजपा का दामन थाम लिया।

राष्ट्रीय राजधानी में नवंबर 2012 की सर्दियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों के गुस्से से जन्मी यह पार्टी तेजी से एक ऐसी राजनीतिक ताकत में तब्दील हो गई जिसने दिल्ली में लगातार तीन बार सरकार बनाई — पहली बार 2013 में, फिर 2015 और 2020 में। बाद में, पंजाब की सत्ता पर भी काबिज हुई।

पार्टी के शुरुआती वर्षों में इसका साथ देने वाले लोगों में कार्यकर्ता, पेशेवर और राजनीति में आए नये लोग शामिल थे। उन्होंने इसे बिल्कुल शुरुआत से खड़ा करने में मदद की। हालांकि, समय के साथ, नेतृत्व शैली और पार्टी की दिशा को लेकर मतभेदों का हवाला देते हुए, इनमें से कई शुरुआती साथी अलग हो गए।