नयी दिल्ली: दो अगस्त (ए)
) दिल्ली की एक अदालत ने नकली दवा निर्माण गिरोह की सीबीआई जांच से जुड़े तीन करोड़ रुपये के रिश्वतखोरी मामले में हरियाणा कैडर के एक आईपीएस अधिकारी और शहर के एक पुलिस निरीक्षक की जमानत याचिकाएं मंजूर कर ली हैं।
विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) में संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत और अपराध शाखा के निरीक्षक प्रदीप सिंह को जमानत दी।
न्यायाधीश ने 31 जुलाई के आदेश में कहा, ‘‘आज अदालत में यह जानकारी दी गई कि व्यावहारिक रूप से जांच पूरी हो चुकी है। केवल डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट आनी बाकी है। गहलावत को एक जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और वह लगभग 30 दिनों से हिरासत में हैं।’’
अदालत ने कहा कि गहलावत से आगे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है और उन्हें जेल में रखने से जांच में कोई मदद नहीं मिलेगी। अदालत ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भी मुकदमे के पूरा होने में काफी समय लगने की संभावना है।
अदालत ने गहलावत को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जाने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने जैसी शर्तें भी लगाई गईं।
न्यायाधीश चंगोत्रा ने सिंह को भी जमानत देते हुए कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और नौ जून को गिरफ्तारी के बाद वह 54 दिनों से हिरासत में हैं।