लखनऊ: 19 मई (ए)
) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को पूरे उत्तर प्रदेश में 900 नयी अदालतें बनाने में राज्य सरकार द्वारा की जा रही देर पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए उसे फटकार लगायी।
अदालत ने आगाह किया कि अगर अगली सुनवाई की तारीख तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया तो मुख्य सचिव और विधिक परामर्शी (एलआर) को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा।मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई को होगी।मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एक खंडपीठ ने राज्य में 9149 अदालतें बनाने से जुड़ी एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार की एक उच्च-स्तरीय समिति ने अक्टूबर 2024 में पहले चरण में 900 अदालतें बनाने के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी थी, जिनमें 225 उच्च न्यायिक सेवा अदालतें, 375 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालतें और 300 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अदालतें शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि कोई ठोस फ़ैसला लेने के बजाय, नयी और बेबुनियाद आपत्तियां उठाकर इस प्रक्रिया में देरी करने की कोशिशें की जा रही हैं जिन्हें कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत की कड़ी टिप्पणियों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक अंतिम अवसर देने का अनुरोध किया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया।