उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक में 2011 की विवादित भर्ती से जुड़ा कानून असंवैधानिक घोषित किया

राष्ट्रीय
Spread the love

नयी दिल्ली: 29 अक्टूबर (ए) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कर्नाटक के उस कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जिसका उद्देश्य राज्य में 2011 में राजपत्रित परिवीक्षाधीन अधिकारियों की विवादित भर्ती के तहत हुई नियुक्तियों को वैध ठहराना था।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि विधायिका उन न्यायिक फैसलों को पलट नहीं सकती, जिनमें चयन प्रक्रिया रद्द किए जाने के फैसले को पहले ही बरकरार रखा गया था। पीठ ने कर्नाटक सिविल सेवा (2011 बैच के राजपत्रित परिवीक्षाधीन अधिकारियों के चयन और नियुक्ति को वैध ठहराने संबंधी) को चुनौती देने वाली अपीलों को स्वीकार कर लिया। इस कानून के तहत उन लोगों को नियुक्तियां दी गई थीं, जिनकी भर्ती प्रक्रिया में पहले ही बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद पाया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि संबंधित कानून असंवैधानिक है। हम इसे रद्द करते हैं। साथ ही, जनहित याचिका और कर्नाटक प्रशासनिक न्यायाधिकरण (केएटी) के आदेश के खिलाफ दायर रिट याचिका में दिए गए फैसलों को भी रद्द करते हैं।सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को मौजूदा भर्ती नियमों के तहत ग्रुप ए और ग्रुप बी सेवाओं में खाली पड़े पदों पर नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। अदालत ने कुछ श्रेणियों के उम्मीदवारों को एक बार के लिए अधिकतम आयु सीमा में छूट देने का भी आदेश दिया। इनमें छह अपीलकर्ता, पिछली भर्ती प्रक्रिया में शामिल पात्र उम्मीदवार और केएटी में लंबित मामलों के याचिकाकर्ता शामिल हैं।