ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामला: अदालत ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज की

भोपाल
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भोपाल: 25 जुलाई (ए)) भोपाल की एक विशेष अदालत ने पूर्व मॉडल एवं अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की कथित दहेज मृत्यु के मामले में आरोपी सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका शनिवार को यह कहते हुए खारिज कर दी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

गिरिबाला सिंह ट्विशा शर्मा की सास हैं। ट्विशा 12 मई को यहां अपने ससुराल स्थित घर में कथित तौर पर फंदे से लटकी मिली थीं। इसके बाद गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र समर्थ सिंह को दहेज के लिए प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है।

जमानत याचिका पहले विशेष न्यायाधीश नीलम शुक्ला की अदालत में सूचीबद्ध थी, लेकिन उन्होंने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। इसके बाद मामला विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्रा की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनी गईं।

अदालत ने शुक्रवार को अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बचाव पक्ष ने मानवीय आधार पर जमानत की मांग करते हुए दलील दी कि गिरिबाला सिंह वृद्ध हैं, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं और उन्हें जेल में समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह की करीब 100 वर्ष की मां उनकी देखभाल पर निर्भर हैं।

उसने यह भी दलील दी कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग किया है। उसने कहा कि हिरासत के दौरान उनके घर में चोरी हुई तथा उन्हें नियमित वेतन और युद्ध वीरांगना पेंशन मिलती है, इसलिए दहेज मांगने का आरोप तर्कसंगत नहीं है।

सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि केवल महिला होना जमानत का आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब मृतका भी एक महिला थी।

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 27 मई को भोपाल की एक अधीनस्थ अदालत द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त कर दिया था।

सीबीआई ने यह भी कहा कि जांच के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपना ‘वॉयस सैंपल’ देने से इनकार कर दिया।

जांच एजेंसी के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने मामले से जुड़े एक सीसीटीवी तकनीशियन और एक सैलून संचालक से संपर्क कर जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया तथा सीसीटीवी फुटेज हासिल करने के लिए एक निजी प्रतिनिधि भी भेजा था।

सीबीआई ने आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं या जांच में बाधा डाल सकती हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी।