इंडोनेशिया को उन्नत मिसाइल देगा भारत, दोनों पक्ष शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत के लिए काम करने पर सहमत

अंतरराष्ट्रीय
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जकार्ता: सात जुलाई (ए)) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच मंगलवार को हुई बातचीत में भारत ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल की आपूर्ति पर सहमति जताई।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने व शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी चर्चा की।

दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा, दवाओं और समुद्री सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

मोदी 2018 की भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत व्यापार तथा सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण के तहत सोमवार को जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।

ऐसा समझा जाता है कि दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में इंडोनेशिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस हथियार की सफलता के बाद हवा से हवा में प्रहार करने वाली ‘अस्त्र’ मिसाइलों का भारत से आयात करने का फैसला किया है।

वियतनाम और फिलीपीन के साथ इसी तरह के रक्षा समझौते करने के बाद अब भारत ने इंडोनेशिया के साथ यह ब्रह्मोस मिसाइल सौदा किया है, हालांकि इंडोनेशिया को आपूर्ति की जाने वाली मिसाइलों की सटीक संख्या की जानकारी नहीं है।

महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए, भारत ने इंडोनेशिया में इस्पात, गिलट और दुलर्भ स्थायी चुंबकों के निर्माण में निवेश करने का फैसला किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘‘आज के युग में, प्रौद्योगिकी की आपूर्ति शृंखला का लचीलापन बहुत मायने रखता है। महत्वपूर्ण खनिजों और इस्पात के क्षेत्र में आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूती देने के लिए भी अहम समझौता हुआ है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी कंपनियों के बीच स्टेनलैस स्टील और दुलर्भ चुंबक को लेकर साझेदारी की नयी शुरुआत हो रही है।’’

भारत और इंडोनेशिया ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह का संयुक्त रूप से विकास करने पर भी सहमति जताई। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है और भारत की ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से लगभग 100 मील (160 किलोमीटर) की दूरी पर है।

वार्ता के बाद अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा, ‘‘2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज एक नयी उड़ान ले रही है। हम विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा.. हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है, आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय शुरू होगा।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता विश्वास द्विपक्षीय रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज हमने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई।’’

मोदी ने इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलुरु का एक परिसर स्थापित करने के निर्णय की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें बहुत खुशी है कि भारत का यूपीआई इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली के साथ जुड़ने जा रहा है। इससे व्यापार सुगमता और यात्रा सुगमता, दोनों को ही बल मिलेगा।’’

दोनों पक्षों ने समुद्री अर्थव्यवस्था, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया।

प्रधानमंत्री और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की।

मोदी ने कहा, ‘‘वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत का मानना है कि संवाद और कूटनीति की भूमिका, पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘फलस्तीन के विषय पर, हम द्वि-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करते हैं।’’