प्रयागराज: 20 अक्टूबर (ए) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विशेष कार्यबल (एसटीएफ) को प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत और कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के नियुक्ति पत्रों और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों के सभी शिक्षक एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्रों और शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रतियां संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे। बेसिक शिक्षा अधिकारी इन दस्तावेजों को एसटीएफ के कार्यालय में जमा करेंगे।न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने एसटीएफ को निर्देश दिया कि वह जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त की मदद से दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था विकसित करे।
एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि 10 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए एक ही प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने निर्देश दिया कि शिक्षा निदेशक इन कार्यवाहियों पर नजर रखेंगे। वह रोजाना निगरानी के लिए किसी अधिकारी को नामित भी कर सकते हैं।
अदालत ने कहा कि इसी तरह, एसटीएफ के अपर महानिदेशक सत्यापन और जांच की निगरानी करेंगे। वह भी रोजाना निगरानी के लिए किसी अधिकारी को नामित कर सकते हैं।
अदालत ने 16 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में चेतावनी दी कि किसी भी अधिकारी की ओर से की गई लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
अदालत ने ये निर्देश देते हुए कहा, “यह सभी जानते हैं कि विद्यार्थियों की संख्या घटने के कारण कई प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। विद्यार्थियों की संख्या संसाधनों की कमी के कारण नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता खराब होने के कारण घटी है।”
मौजूदा मामले में अध्यापिका कुसुमलता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि याचिकाकर्ता ने कुसुमलता श्रीवास्तव नाम की महिला के शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल की। कुसुमलता श्रीवास्तव पहले से ही गोरखपुर में सहायक अध्यापिका के तौर पर कार्यरत हैं।
एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की है। कई मामलों में 10 या उससे अधिक लोगों ने शैक्षणिक दस्तावेजों के एक ही सेट के आधार पर नौकरी हासिल की।
