ठाणे: सात नवंबर (ए) महाराष्ट्र के ठाणे में नवजात बच्चे को बेचने में शामिल एक गिरोह के 10 सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक होमगार्ड कर्मी भी शामिल है। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बचा लिया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस उपायुक्त (जोन-एक) बालासाहेब पाटिल ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मुंब्रा पुलिस थाने की टीम ने शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर शुक्रवार को 20 दिन के बच्चे को सुरक्षित बचा लिया।
उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता 19 वर्षीय अनीसा रफीक शेख मुंब्रा रेलवे स्टेशन के पास भीख मांगकर अपना गुजारा करती है। आरोपी रेहान रिजवान शेख (22) ने उसे ढाई लाख रुपये में अपने बेटे को बेचने के लिए मजबूर किया था।
पाटिल के मुताबिक, रेहान ने शुरुआत में अनीसा को 1.2 लाख रुपये दिए थे। हालांकि, बाद में उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर अनीसा और उसकी बहन की पिटाई की और जबरन पैसे वापस ले लिए।
इस घटना के बाद पांच नवंबर 2026 को मुंब्रा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
बच्चे को बचाने और गिरोह का पता लगाने के लिए पुलिस की एक टीम गठित की गई।
पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ठाणे से सात आरोपियों ज्योति नरेश पाटिल (35), रेहान रिजवान शेख (22), फरहान उर्फ फेराउ रेहान शेख (21), फरीदा अकबर सैयद (52), हुर्ना उर्फ हुस्ना अल्ताफ शेख (27), अनीता गोपीनाथ धोटरे (42) और सुनीता प्रवीण खैरनार (30) को गिरफ्तार किया।
मामले की जांच में पुलिस की टीम जालना जिले पहुंची, जहां उसने मुंबई के घाटकोपर में तैनात होमगार्ड कर्मी गोपीनाथ किसान धोटरे (46) को हिरासत में लिया। उसने बच्चे को बेचने में मदद की थी।
इसी दौरान पुलिस की एक अन्य टीम ने रत्नागिरी में बच्चे का पता लगाया और उसे सुरक्षित ठाणे ले आई।
गिरोह के दो अन्य सदस्यों डोंबिवली (पश्चिम) की प्रतिमा प्रकाश परब (46) और दिवा की शिल्पा प्रदीप साठे (34) को छह नवंबर को गिरफ्तार किया गया।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस फिलहाल इस बात की जांच कर रही है कि बच्चे को किसे बेचा गया था। यह भी पता नहीं चला है कि गिरोह इस तरह के किसी अन्य अपराध में शामिल रहा है या नहीं।
गिरफ्तार किए गए सभी 10 आरोपियों को 10 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
बचाए गए बच्चे को चिकित्सकीय जांच के बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के निर्देश पर डोंबिवली स्थित ‘जननी आशीष संस्था’ की देखरेख में रखा गया है। बच्चे की आगे की देखभाल और अभिरक्षा के संबंध में समिति निर्णय लेगी।
