भोपाल: 12 अगस्त (ए) मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में एनालॉग (कृत्रिम) पनीर पर रोक लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को कहा कि ऐसे खाद्य पदार्थ बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यादव ने भोपाल में पत्रकारों से कहा कि राज्य में सिर्फ प्राकृतिक पनीर बेचने की इजाज़त होगी। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने मध्य प्रदेश में कृत्रिम (एनालॉग) पनीर की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। दूसरे राज्यों में भी इस पर रोक लगाई गई है। हमारे पास प्राकृतिक दूध से बने उत्पाद हैं, इसलिए हम प्राकृतिक पनीर बनाएंगे। हम इन्हीं उत्पादों के आधार पर राज्य की पहचान बनाएंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देगा।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात ने हाल ही में एनालॉग पनीर पर रोक लगाई है।
एनालॉग पनीर पारंपरिक डेयरी-आधारित पनीर का एक विकल्प है, जिसमें दूध के घटकों को आंशिक या पूरी तरह से गैर-डेयरी सामग्री, जैसे वनस्पति वसा या प्रोटीन और अन्य उत्पादों से बदल दिया जाता है, जिनका मानव शरीर पर बुरा असर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि दूसरे राज्यों की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। सरकार का जोर प्राकृतिक तरीके से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और उसी से गुणवत्तापूर्ण पनीर तैयार करने पर रहेगा। सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे उत्पादों की पहचान, निगरानी और बिक्री पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में पहले ही एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। प्रतिबंध के बाद इन राज्यों में संदिग्ध उत्पादों की जब्ती और जांच की जा रही है। गुजरात सरकार ने आगे की कार्रवाई और रणनीति के लिए टास्क फोर्स का गठन भी किया है।
