ईरान-अमेरिका ने शांति समझौते पर किए दस्तखत, ट्रंप, जेडी वेंस और ईरानी स्पीकर ने की वर्चुअली साइन

अंतरराष्ट्रीय
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वाशिंगटन,15 जून (ए)।अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने एक समझौता ज्ञापन पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए हैं। औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को जिनेवा में होंगे।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर दोनों पक्षों ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में किए जाएंगे, जिसके बाद यह प्रभावी हो जाएगा।उपराष्ट्रपति वेंस ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि समझौते के तहत ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक राहत या प्रतिबंधों में छूट तभी मिलेगी, जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक ईरान को कोई धनराशि जारी नहीं की गई है और यह प्रक्रिया पूरी तरह प्रदर्शन आधारित होगी। वेंस के अनुसार, यदि ईरान अपने संवर्धित परमाणु सामग्री के भंडार को कम करने और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था को स्वीकार करने जैसे कदम उठाता है, तो अमेरिका प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोबारा शामिल होने का अवसर देना है, बशर्ते वह समझौते की शर्तों का पालन करे।वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि समझौते का पूरा हिस्सा शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर के बाद सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति वेंस हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे, जबकि उनकी अपनी उपस्थिति अभी तय नहीं है।

अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने पहले ही इस समझौते पर साइन कर दिए हैं। शुक्रवार को औपचारिक रूप से साइन करने का समारोह होने की उम्मीद है।अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कई अहम मुद्दों पर अभी और बातचीत की जरूरत है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता तनाव कम करने का एक ढांचा (फ्रेमवर्क) बनाता है और अनसुलझे मामलों पर तकनीकी बातचीत का रास्ता तैयार करता है। यह समझौता महीनों की लड़ाई के बाद हुआ है, जो फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य हमलों और उसके बाद अमेरिकी हितों और क्षेत्रीय सहयोगियों पर ईरान के हमलों के बाद शुरू हुई थी।