इस्लामाबाद: 25 अप्रैल (ए)
) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को यहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की।
जबकि राजधानी में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का दूसरा दौर टूटने के कगार पर है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा X पर जारी बयान के अनुसार, अराघची “क्षेत्र की स्थिति” पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री हाउस पहुंचे.
खास बात यह रही कि इस बैठक में नागरिक नेतृत्व के साथ सेना भी मौजूद थी. पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी बातचीत में शामिल हुए.
दिन में पहले, अराघची ने मुनीर से अलग से भी मुलाकात की, जिससे यह साफ होता है कि वॉशिंगटन के साथ बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान की विदेश नीति में सेना की मजबूत भूमिका है.
जहां पाकिस्तान का नेतृत्व मेहमानों का जोरदार स्वागत कर रहा है, वहीं जमीन पर हकीकत यह दिखाती है कि देश अपनी मध्यस्थता की कोशिशों को संभालने में संघर्ष कर रहा है.
आने वाले मेहमानों की सुरक्षा के लिए देश ने अपनी ही राजधानी को “कड़े सुरक्षा लॉकडाउन” में डाल दिया है.
प्रशासन ने बड़े रास्तों को बंद कर दिया है और हाई-सिक्योरिटी रेड ज़ोन को सख्त घेराबंदी में रखा है.
लेकिन, आम लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित करने के बावजूद, पाकिस्तान वह एक चीज हासिल नहीं कर पाया जिसके लिए यह लॉकडाउन किया गया था, यानी अमेरिका और ईरान के बीच असली बैठक.
कड़ी सुरक्षा के बावजूद, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तर की शांति वार्ता की संभावना “तेजी से खत्म हो रही है”. इससे यह सामने आता है कि मेजबान देश कूटनीतिक रूप से कमजोर पड़ रहा है, क्योंकि तेहरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर रहा है. यह बात पाकिस्तान के न्यूज चैनल के चेयरमैन कामरान खान ने कही.
पाकिस्तान जहां बड़े स्तर पर कूटनीतिक तैयारी कर रहा है, वहीं असली पक्षकारों ने उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है. इससे इस्लामाबाद अपने ही शहर में सिर्फ दर्शक बनकर रह गया है.
कामरान खान ने सूत्रों के हवाले से कहा कि तेहरान “अब भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए तैयार नहीं है”. इस प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सीनियर सलाहकार और दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं.
ईरान ने अपने पाकिस्तानी मेजबानों को दरकिनार करते हुए सीधे वॉशिंगटन के सामने शर्तें रखी हैं. उसकी शर्त है कि अमेरिकी नौसेना पहले होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी हटाए.
कामरान खान ने X पर लिखा, “आज इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता के दूसरे दौर के फिर से शुरू होने की संभावना तेजी से खत्म हो रही है, क्योंकि तेहरान अभी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने को तैयार नहीं है.”
इस हफ्ते का यह कूटनीतिक माहौल पहले की असफलताओं जैसा ही दिख रहा है. इस्लामाबाद में हुई पहली वार्ता, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय स्पीकर एमबी गालिबाफ शामिल थे, 21 घंटे तक चली लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
जबकि पाकिस्तान के नेता ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ खुद को मध्यस्थ के रूप में दिखा रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर कहानी कूटनीतिक कमजोरी की ही है. इस्लामाबाद ने अपनी राजधानी तो बंद कर दी, लेकिन वह अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में पूरी तरह असफल दिख रहा है.