वाशिंगटन: तीन नवंबर (एपी) महंगाई से परेशान और ईरान के साथ अलोकप्रिय युद्ध को लेकर नाराज अमेरिका के मतदाता मंगलवार को यह तय करेंगे कि क्या वे अमेरिका की सत्ता के समीकरण को बड़े पैमाने पर बदलना चाहते हैं। मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल पर जनमत संग्रह के रूप में देखे जा रहे हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता सतर्कता और आशावादी दृष्टिकोण के साथ चुनाव पर नजर रखे हुए हैं। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी ने चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में उन राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों में करोड़ों डॉलर खर्च किए, जहां दो साल पहले ट्रंप ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।
डेमोक्रेट को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के अपने वादे को पूरा करने में ट्रंप की नाकामी और आम लोगों की समस्याओं के बजाय देश की राजधानी को सजाने-संवारने पर उनके अधिक ध्यान देने की धारणा से रिपब्लिकन मतदाताओं का उत्साह कम होगा और उनके अपने समर्थक बड़ी संख्या में मतदान करेंगे।
रिपब्लिकन पार्टी को उम्मीद थी कि चुनाव प्रचार में पैसे के मामले में उसकी बढ़त से नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, पार्टी को प्रतिनिधि सभा में अपना नियंत्रण खोने की आशंका है और वह सीनेट में अपना बहुमत बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। इस साल की शुरुआत में ऐसा नतीजा असंभव लग रहा था, क्योंकि चुनावी मुकाबलों का गणित रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में माना जा रहा था।
हालांकि, दोनों सदनों में मुकाबला बेहद करीबी है और एक या दो सीटों से नतीजा बदल सकता है। 100 सदस्यीय सीनेट में बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट को चार सीटों का शुद्ध लाभ हासिल करना होगा। यह आसान नहीं है, क्योंकि सबसे कड़े मुकाबलों वाले कई राज्य परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ रहे हैं।
वहीं, 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए डेमोक्रेट को केवल तीन सीटें जीतनी होंगी।
सोमवार तक पांच करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता पहले ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। कई महत्वपूर्ण राज्यों में शुरुआती मतदान चार साल पहले के चुनाव से अधिक रहा।
ट्रंप ने मतदाताओं से कहा है कि वे ऐसे मतदान करें, मानो वह खुद चुनाव लड़ रहे हों। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के कई उम्मीदवार उनसे दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने रविवार को कंसास के सलीना में चुनाव प्रचार के आखिरी दौर की कई दर्जन रैलियों में से अंतिम रैली में कहा, ”मैं वास्तव में चाहता हूं कि आप ऐसा समझकर मतदान करें, जैसे मैं भी चुनाव मैदान में हूं।”
मंगलवार को फ्लोरिडा के पाम बीच गार्डन्स में मतदान करने वाले मार्क बार्कर ने कहा कि उनके दिमाग में ट्रंप ही छाए हुए हैं।
बार्कर ने कहा, ”मैं शुरू से ही ट्रंप पर नजर रख रहा हूं। मुझे सच में लगता है कि वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।”
उन्होंने कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहने पर अमेरिका के प्रत्येक वयस्क को पांच हजार डॉलर देने के ट्रंप के वादे, सीमा नीति और पश्चिम एशिया में युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”उन्होंने जो कुछ भी किया है, वह शानदार रहा है।”
वहीं, उत्तरी कैरोलाइना की राजधानी रैले में 57 वर्षीय लाइब्रेरियन जेम्स मूर ने कहा कि उन्होंने ट्रंप के बड़े कर छूट और सरकारी खर्च में कटौती संबंधी विधेयक का विरोध करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट दिया। उन्होंने कहा, ”मैं अब अधिक कर चुका रहा हूं। स्वास्थ्य सेवाओं पर मेरा खर्च बढ़ गया है। हर चीज के लिए मुझे अधिक पैसे देने पड़ रहे हैं। हमें कांग्रेस में ऐसे और प्रतिनिधियों की जरूरत है जो ट्रंप का विरोध कर सकें।”
ट्रंप ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में उन राज्यों का भी दौरा किया, जहां रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत जनाधार है। इनमें मिसिसिपी, दक्षिण कैरोलाइना और टेक्सास शामिल हैं। यह उनकी पार्टी के सामने मौजूद चुनौतियों को दर्शाता है।
इन चुनावों के नतीजे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों की दिशा तय करेंगे। अब तक रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली कांग्रेस ने ट्रंप के अधिकतर एजेंडे को बिना किसी खास विरोध के मंजूरी दी है। ट्रंप ने उन्हें रोकने की कोशिशों को नाकाम करने में सफलता हासिल की है। लेकिन अगर डेमोक्रेट कांग्रेस के किसी एक सदन का भी नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो जांच और महाभियोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज तथा ट्रंप के पूर्व शीर्ष सलाहकार एलन मस्क जांच के संभावित निशाने बन सकते हैं।
डेमोक्रेट का चुनाव में बेहद अच्छा प्रदर्शन संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवारों को भी मजबूती दे सकता है। इनमें कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम, इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर और पूर्व परिवहन मंत्री पीट बटिगीग शामिल हैं। वहीं, इससे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य रिपब्लिकन नेताओं की राह मुश्किल हो सकती है, जो ट्रंप के प्रति अपनी वफादारी को राजनीतिक लाभ में बदलना चाहते हैं।
2026 के चुनाव अब तक के सबसे महंगे चुनाव साबित हो सकते हैं। ट्रंप से जुड़े संगठनों और मस्क से मिले धन के कारण रिपब्लिकन पार्टी की चुनाव समितियों ने डेमोक्रेटिक पार्टी की तुलना में कहीं अधिक चंदा जुटाया और खर्च किया है। हालांकि, उम्मीदवारों के स्तर पर डेमोक्रेट ने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वियों से अधिक चंदा जुटाया है
