वाशिंगटन: 25 मई (ए
) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के साथ शांति वार्ता “अच्छी तरह से” आगे बढ़ रही है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता से परामर्श के लिए जिस जटिल संचार नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है, उसके चलते अंतिम फैसले में कुछ समय लग सकता है।
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थता कर रहे देशों को अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए, जो इजराइल और अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक एवं सुरक्षा संबंध स्थापित करने से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि ईरान का इस समझौते पर हस्ताक्षर करना सम्मान की बात होगी।
ट्रंप ने कहा, “अमेरिका की ओर से इस बेहद जटिल पहेली को सुलझाने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बाद, इन सभी देशों के लिए यह अनिवार्य होना चाहिए कि वे कम से कम अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें।”
हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर एक-दो देश के पास ऐसा न करने का कोई कारण हो तो इसे स्वीकार किया जा सकता है।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के मध्यस्थों में से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन पहले ही अब्राहम समझौते पर दस्तखत कर चुके हैं। ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन भी इस समझौते पर हस्ताक्षर करें।
इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई एक अज्ञात स्थान से काम कर रहे हैं, जिसका बाहरी दुनिया से बहुत सीमित संपर्क है। उन्होंने कहा कि खामेनेई से केवल संदेशवाहकों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक, जब अमेरिका अपनी प्रस्तावित शर्तों का विवरण भेजता है, तो ईरानी अधिकारियों को उन्हें सर्वोच्च नेता तक पहुंचाने में समय लगता है, जिससे संभावित प्रतिक्रिया में देरी होती है।
ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मसौदा समझौते की मौजूदा रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। इसके बाद ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
अमेरिकी मीडिया की खबरों के अनुसार, ईरान के अधिकांश नेता अपना पता-ठिकाना छिपाने के लिए हफ्तों से बंकर के अंदर रह रहे हैं और जब तक आवश्यक न हो, वे एक-दूसरे से संपर्क करने से भी बचते हैं।
खबरों में कहा गया है कि ईरान सरकार के शीर्ष पदाधिकारियों को भी नहीं पता कि खामेनेई कहां हैं और उनके पास सर्वोच्च नेता से सीधे संपर्क स्थापित करने का कोई जरिया भी नहीं है। इनमें कहा गया है कि नेताओं के संदेश खामेनेई का पता-ठिकाना छिपाने के लिए बनाए गए संदेशवाहकों के एक जटिल नेटवर्क के जरिये उन तक पहुंचाए जाते हैं।