राउत ने सांसदों को 50 करोड़ रुपये का प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया, बागियों को इस्तीफे की चुनौती दी

राष्ट्रीय
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मुंबई: 17 जून (ए)) उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में फूट पड़ने की अटकलें तेज होने के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने बुधवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए ‘‘50 करोड़ रुपये’’ की पेशकश की जा रही है और उन्होंने बागी सांसदों को पार्टी छोड़ने से पहले इस्तीफा देने की चुनौती भी दी।राउत ने, 2022 में हुई नेताओं की बगावत का नयी दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान जिक्र करते हुए कहा कि अगर पार्टी में फिर उसी तरह फूट डाली गई तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (उबाठा) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे।

इस संवाददाता सम्मेलन में शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन- अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए।

राउत ने कहा कि एक ‘‘महत्वपूर्ण व्यक्ति’’ ने मंगलवार देर रात उन्हें बताया कि महाराष्ट्र के सांसदों को ‘‘खरीदने’’ की कोशिश की जा रही है।

राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘मुझे बताया गया कि कीमत 50 करोड़ रुपये है और रात तक प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपये पहुंचाए जाने थे। वे धन मिले बिना विमान में सवार होने को कथित रूप से तैयार नहीं थे।’’

उन्होंने हालांकि कहा कि पार्टी के पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और कुछ सांसदों के अलग होने की खबरें मीडिया के जरिये मिल रही हैं।

राउत ने कहा, ‘‘अगर कोई पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए। वे हमारी पार्टी के टिकट पर और मतदाताओं द्वारा चुने जाने के कारण संसद पहुंचे हैं।’’

उन्होंने कहा कि पार्टी ने कानूनी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक के लिए ‘व्हिप’ जारी किया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उनसे संविधान के प्रावधानों के अनुरूप सख्ती से कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है।

सावंत ने कहा कि किसी भी सांसद ने पार्टी छोड़ने के फैसले के बारे में आधिकारिक रूप से सूचित नहीं किया है और सभी खबरें मीडिया एवं सोशल मीडिया के जरिये सामने आ रही हैं।

देसाई ने कहा कि पार्टी को अपने सांसदों पर अब भी पूरा भरोसा है लेकिन एहतियात के तौर पर कानूनी उपाय किए जा रहे हैं।

शिवसेना (उबाठा) नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को ‘‘खरीदने और दलों को तोड़ने’’ की प्रवृत्ति लोकतंत्र तथा संविधान के लिए खतरा है।

तीनों नेताओं ने कहा, ‘‘हमारे पास किसी तरह की फूट की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हमें ये खबरें मीडिया से मिल रही हैं और हम उन्हीं पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।’’

राउत ने उद्धव ठाकरे के साथ रविवार को हुई शिवसेना (उबाठा) सांसदों की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि एक सांसद ने चार बार साईं बाबा की कसम खाई, दूसरे ने देवी भवानी के नाम पर शपथ ली तथा बाकियों ने अपने बच्चों और माताओं की कसम खाकर कहा कि वे हमारे साथ बने रहेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने इन सांसदों के लिए खून-पसीना बहाया है। हमने उन्हें टिकट दिया और अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक मदद भी की। ’’

राउत ने कहा कि ये सांसद उद्धव बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के कारण निर्वाचित हुए हैं न कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कारण।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने ‘व्हिप’ जारी कर संसदीय दल की बैठक बुलाई है। हमने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को खरीदना और दलों को तोड़ना लोकतंत्र तथा संविधान के विरुद्ध है।’’

राउत ने कहा कि इसके बाद कानूनी लड़ाई होगी और यह इतना आसान नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई सोचता है कि कुछ लोग एकत्र होकर धन के जरिये मामला निपटा सकते हैं तो वह गलतफहमी में है।

राउत ने धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर पर दबाव डाले जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सांसद के पिता की हत्या के 20 साल पुराने मामले में बुधवार को फैसला सुनाया जाना था।

राउत ने कहा, ‘‘उनसे कथित तौर पर कहा गया कि अगर वह अपने पिता की हत्या के मामले में अपने पक्ष में फैसला चाहते हैं तो उन्हें उनके गुट में शामिल हो जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि अब इस मामले में शनिवार को फैसला सुनाए जाने की संभावना है।

राउत ने कहा, ‘‘अगर ऐसा हो रहा है तो संविधान, अदालतों और लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है? बृहस्पतिवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। सभी को आमंत्रित किया गया है और सभी को बैठक में शामिल होना चाहिए।’’

शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा, ‘‘पार्टी ने हमें जो कुछ दिया है, उसे हम भूल नहीं सकते। बालासाहेब ठाकरे ने हमें बेटों की तरह माना और उद्धव ठाकरे ने हमेशा भाइयों जैसा व्यवहार किया।’’