राज्य किसी वयस्क महिला को उसके माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर नहीं कर सकता : अदालत

राष्ट्रीय
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मुंबई: सात जुलाई (ए) मुंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक बालिग महिला यह तय करने के लिए कानूनी रूप से सक्षम है कि वह कहां रहना चाहती है और कोई सरकारी अधिकारी उसे उसके माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अदालत ने तेलंगाना पुलिस को आदेश दिया कि वह 21 साल की महिला के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने दो जुलाई के आदेश में कहा कि महिला ने हैदराबाद में अपने माता-पिता का घर अपनी मर्जी से छोड़ा था।

अदालती आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई।

अदालत ने कहा कि वह (युवती) बालिग है और कानूनी तौर पर यह तय करने में सक्षम है कि वह कहां रहना चाहती है, क्या शादी करना चाहती है और क्या उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती है।

अदालत ने कहा, “यह निजी पसंद के मामले हैं और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकारों का हिस्सा हैं। न तो उसके माता-पिता और न ही राज्य उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर कर सकते हैं।”

न्यायाधीशों ने कहा कि पुलिस महिला को लापता व्यक्ति नहीं मान सकती थी और न ही उसे उसके माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर करने वाले कदम उठा सकती थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई के जरिए दायर महिला की याचिका में कहा गया है कि उसने जून 2026 में अपने गोद लेने वाले माता-पिता का घर छोड़ दिया था, क्योंकि वह अपने से दस साल बड़े रिश्ते के भाई से शादी नहीं करना चाहती थी।

उसने बताया कि उसका परिवार बहुत ज्यादा रूढ़िवादी और पुराने ख्यालों वाला था। उसने आरोप लगाया कि उसे मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और उसे स्नातक करने या नौकरी करने की इजाजत नहीं दी गई।

उसने परिवार से मिल रही धमकियों और उत्पीड़न से सुरक्षा की भी मांग की।

महिला से बात करने के बाद उच्च न्यायालय ने पाया कि वह एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के साथ काम कर रही थी और मुंबई में पेइंग गेस्ट के तौर पर रह रही थी।

याचिका के अनुसार, जब वह दो महीने की थी, तब उसे गोद लिया गया था।

महिला की मां ने एक हलफनामा देकर भरोसा दिलाया कि महिला की मर्जी के खिलाफ उसकी शादी के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और उसकी उच्च शिक्षा में कोई रुकावट नहीं आएगी।

युवती ने अदालत को बताया कि वह घर वापस नहीं जाना चाहती।

अदालत ने तेलंगाना पुलिस को महिला के माता-पिता द्वारा दर्ज कराई गई गुमशुदगी की रिपोर्ट बंद करने के लिए कदम उठाने का आदेश दिया और कहा कि उसे अपने माता-पिता के घर लौटने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।