अटलांटा: एक नवंबर (एपी) अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से चुनाव हारने के बाद ब्राजील छोड़कर अमेरिका पहुंचे फ्लावियो बोल्सोनारो की देश छोड़ने में कोई मदद नहीं की थी।
ब्राजील के राष्ट्रपति पद के चुनाव में पराजित उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो बुधवार को मियामी पहुंचे थे। इससे एक दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि बोल्सोनारो और उनके परिवार को अमेरिकी वीजा दिया जाएगा।
इससे पहले सप्ताहांत में बेहद कड़े मुकाबले वाले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में लातिन अमेरिका में रूढ़िवादी दलों की लगातार जीत का सिलसिला टूट गया था।
जी20 के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए अटलांटा में मौजूद रुबियो ने पत्रकारों से कहा, “हमने किसी भी तरह की मदद नहीं की।”
उन्होंने कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि वह अमेरिका पहुंच गए हैं। उनके पास पहले से वीजा था और राष्ट्रपति ने उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति देने का फैसला किया।” रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सरकार उनके आने-जाने से जुड़े किसी भी कदम में सीधे तौर पर शामिल नहीं थी।
रुबियो ने यह भी बताया कि अटलांटा में शुक्रवार और शनिवार को उनकी ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा से मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि नवंबर में फ्रांस में विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी उनकी ब्राजील के अधिकारियों से मुलाकात होने की उम्मीद है।
बोल्सोनारो ने चुनाव में अपनी हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और बिना कोई सबूत दिए चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। उनके पिता और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने भी 2022 में लूला से मिली हार स्वीकार नहीं की थी।
वह तख्तापलट की कोशिश के मामले में 27 साल की सजा काट रहे हैं।
