लखनऊ: 23 अक्टूबर (ए) उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस ने औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने 175 से अधिक सीट की प्रारंभिक सूची सौंपी है, जहां उसे लगता है कि वह गठबंधन में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने ‘ बताया कि यह सूची कुछ दिन पहले सपा नेताओं के साथ साझा की गई थी और जल्द ही दोनों दलों के नेता सीट बंटवारे पर विस्तृत चर्चा के लिए बैठेंगे। गौतम ने कहा, “मैं आपको सटीक संख्या नहीं बता सकता, लेकिन हमने 175 से 200 सीट की सूची सौंपी है।”
उन्होंने संकेत दिया कि 403 विधानसभा सीट वाले राज्य में चुनाव से पहले पार्टी बातचीत के लिए तैयार है।
कांग्रेस नेता ने कहा, “दोनों दलों का नेतृत्व एक साथ बैठकर सीट बंटवारे की बारीकियों को तय करेगा।”
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस की प्रारंभिक सूची पर कहा, “मुझे लगता है कि हमारे नेता अखिलेश यादव जी ने स्पष्ट कर दिया है कि जीतने की क्षमता ही एकमात्र मानदंड है। इसलिए कोई भी कुछ भी मांग सकता है, लेकिन राजनीति में सर्वमान्य और सार्थक समाधान तक पहुंचने के लिए दिखावे से आगे बढ़ना होगा।”
यह संशय निराधार नहीं है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार 1989 के बाद से लगातार घटा है। उस वर्ष पार्टी ने आखिरी बार राज्य में सरकार बनाई थी।
कांग्रेस ने 2022 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा था, लेकिन उसे केवल दो सीट पर जीत मिली थी। यह संख्या 2017 में जीती गई सात सीट से भी कम थी।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी की उम्मीदें बढ़ाई हैं। उस चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में सपा के साथ गठबंधन करके 80 में से छह लोकसभा सीट जीती थीं, जबकि सपा को 37 और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 33 सीट मिली थीं। कांग्रेस नेताओं ने स्वीकार किया कि सीट बंटवारे को लेकर उनकी उम्मीदों का आधार यही नतीजे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह स्पष्ट है और 2024 का लोकसभा चुनाव इस बात का प्रमाण है कि दोनों दल (कांग्रेस और सपा) मिलकर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए राजनीति में सार्थक लेन-देन की गुंजाइश होनी चाहिए।”
गौतम ने कहा कि उन्हें उचित सीट बंटवारे की उम्मीद है और दोनों दल मिलकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
कांग्रेस की प्रदेश इकाई में हाल में हुए नेतृत्व परिवर्तन को भी सौहार्दपूर्ण सीट बंटवारे की व्यवस्था की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी ने पूर्व अध्यक्ष अजय राय की जगह विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
कई लोगों का मानना है कि राय सपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के इच्छुक नहीं थे और उनका विचार था कि चुनाव के बाद समझौता करना पार्टी के लिए अधिक उपयुक्त रहेगा। हालांकि, कुछ नेताओं का मानना है कि सपा नेतृत्व के साथ मोना के बेहतर संबंध भी उनके चयन का एक कारण रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि भाजपा की रणनीति से सबक लेते हुए कांग्रेस ने भी पार्टी की स्थिति के आकलन के आधार पर सीटों को वर्गीकृत किया है। सीट बंटवारे पर बातचीत इसी पहलू पर केंद्रित होगी।
वर्ष 2027 का चुनाव मुख्य रूप से भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और सपा नीत विपक्ष के बीच होता दिख रहा है। कांग्रेस, सपा के साथ विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल है और सीट बंटवारे में बड़ा हिस्सा मांग रही है।
राजग के छोटे सहयोगी दल अपना दल (एस) और निषाद पार्टी की सहायक भूमिका रह सकती है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक अलग राजनीतिक कारक बनी हुई है, जबकि सीट बंटवारे और जातीय समीकरणों का चुनाव पर असर पड़ने की संभावना है।
