नयी दिल्ली: दो नवंबर (ए) उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी श्रीनाथ जोशी महादेव को कर्नाटक उच्च न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।
कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने महादेव पर भ्रष्टाचार के एक मामले में अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।कर्नाटक हाईकोर्ट का अग्रिम जमानत आदेश खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने 29 अक्तूबर को महादेव को आदेश की तारीख से तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह कानून के अनुसार उचित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र होंगे। पीठ ने कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस की ओर से दाखिल अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें उच्च न्यायालय के एक सितंबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत महादेव को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी गई थी। महादेव उस समय लोकायुक्त में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि इसकी ‘गहन जांच’ की आवश्यकता है और ‘‘उच्च न्यायालय का प्रतिवादी को अग्रिम जमानत देकर हिरासत में पूछताछ की संभावना को पूरी तरह खत्म कर देना उचित नहीं था’’। यह मामला दो जून, 2025 को भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम-1988 के तहत दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। शुरुआत में केवल बर्खास्त पुलिस आरक्षी निंगप्पा सावंता को बतौर आरोपी नामजद किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सावंता ने स्वयं को लोकायुक्त कार्यालय का अधिकारी बताकर सरकारी कर्मचारियों को धमकाया था और उनसे वसूली की थी। बाद में, सवन्था द्वारा किए गए खुलासों के आधार पर महादेव को भी इस मामले में आरोपी संख्या-2 के तौर पर नामजद किया गया।
