भाड़े का सैनिक अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिक तिहाड़ जेल से रिहा

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नयी दिल्ली: 25 सितंबर (ए) म्यांमा के जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और अनधिकृत यात्रा करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए सात विदेशियों में से कथित भाड़े के सैनिक अमेरिकी व्यक्ति मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और एक यूक्रेनी नागरिक को बृहस्पतिवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया, ताकि वे अपने देश जा सकें। यह जानकारी शुक्रवार को अधिकारियों ने दी।

दिल्ली की एक अदालत द्वारा इस मामले में गिरफ्तार सभी विदेशी नागरिकों को ‘डिफ़ॉल्ट ज़मानत’ दिए जाने के बाद, दोनों विदेशियों को कुछ शर्तों और ज़रूरी औपचारिकताओं को पूरा करने पर अपने परिवारों से मिलने एक महीने के लिए स्वदेश जाने की अनुमति दी गई।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से गैर-कानूनी तरीके से भारत में घुसने, रहने और घूमने-फिरने के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद उन्हें ‘डिफ़ॉल्ट ज़मानत’ मिल गई, लेकिन उन पर यूएपीए जैसे आतंकवाद-रोधी कानून के तहत आरोप नहीं लगाए गए।

बृहस्पतिवार को वैनडाइक को तिहाड़ जेल से बाहर निकलते देखा गया। उसने अपना चेहरा ढक रखा था और फिर वह एक कार में बैठ गया।

एनआईए ने 13 मार्च को वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे से, जबकि यूक्रेन के नागरिकों-पेट्रो हर्बा, तारास स्लीवियाक और इवान सुकमनोव्स्की को लखनऊ हवाई अड्डे से गिरफ़्तार किया था। उसी दिन दिल्ली हवाई अड्डे पर तीन अन्य यूक्रेनी नागरिकों — मारियन स्टेफनकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिन्स्की को गिरफ़्तार किया गया था।

संघीय जांच एजेंसी म्यांमा में जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े ड्रोन-युद्ध प्रशिक्षण शिविर में सातों विदेशी नागरिकों की कथित संलिप्तता की जांच कर रही है।

अदालत ने 18 सितंबर को वैनडाइक को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और एक लाख रुपये की ज़मानत राशि पर ज़मानत दे दी थी। इसके बाद उसने अमेरिका जाने की अनुमति के लिए अर्ज़ी दी।

एनआईए अदालत ने 23 सितंबर को उसकी ज़मानत शर्तों में बदलाव किया, जिससे तय शर्तों के साथ एक महीने के लिए उसके अमेरिका जाने का रास्ता साफ़ हो गया।

अधिकारियों ने बताया कि ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बृहस्पतिवार को आरोपियों को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया।