अदालत ने 2021 के मामले में लॉरेंस बिश्नोई, 19 अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 21 अप्रैल (ए)) दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और 19 अन्य लोगों के खिलाफ मकोका प्रावधानों के तहत आरोप तय करने का आदेश देते हुए कहा कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसके साथ ही मुकदमे का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धारा तीन (संगठित अपराध) और चार (संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य की ओर से अघोषित संपत्ति रखना) के तहत बिश्नोई और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।

कुछ अन्य आरोपियों पर भी शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाने का आदेश दिया गया।

दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने मार्च 2021 में संदीप उर्फ ​​काला जठेड़ी और बिश्नोई समेत उसके 19 साथियों के नेतृत्व वाले एक कथित संगठित आपराधिक गिरोह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि जठेड़ी कुख्यात अंतरराज्यीय गैंगस्टर था, जो अपने सहयोगियों के साथ एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट चला रहा था और आर्थिक लाभ के लिए लगातार जघन्य अपराध कर रहा था।

न्यायाधीश शर्मा ने मंगलवार को जारी 79 पन्नों के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष के आरोप गवाहों के बयानों, दस्तावेजों, आधिकारिक रिकॉर्ड और इकबालिया बयानों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि आरोप तय करने के चरण में इन साक्ष्यों पर ‘‘बेवजह संदेह नहीं किया जा सकता।’’

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मामले के रिकॉर्ड के आधार पर, आरोपियों ने प्रथम दृष्टया अपराध किए हैं।’’

अभियोजन पक्ष द्वारा जुटाए गए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने कहा कि जठेड़ी और उसके साथियों ने एक संगठित गिरोह बनाया था।

इस मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय की गई है।

अदालत के आदेश में गवाहों के बयानों का उल्लेख किया गया है, जिनके अनुसार आपराधिक गिरोह के सदस्य स्थानीय व्यापारियों, शराब की दुकानों के मालिकों और अन्य स्थानीय दुकानदारों से गिरोह की ओर से भारी मात्रा में जबरन वसूली और सुरक्षा शुल्क वसूल रहे थे।

इसमें कहा गया, ‘‘जबरन वसूली या सुरक्षा के लिए ली गई रकम का इस्तेमाल गिरोह की गतिविधियों को संचालित करने के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने में किया जा रहा था, जो कि (कुछ) आरोपियों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी से स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है।’’

अदालत ने संपत नेहरा, जगदीप, राजकुमार, रविंदर सिंह, नरेश और प्रियव्रत उर्फ ​​फौजी के खिलाफ अवैध हथियार और गोला-बारूद रखने के आरोप में शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने प्रियव्रत के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज करने का निर्देश दिया, क्योंकि उसके पास से आठ ग्रेनेड बरामद किए गए थे।