नयी दिल्ली: 12 अगस्त (ए) उच्चतम न्यायालय ने फर्जी वकीलों, कानून की फर्जी डिग्री वाले लोगों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा है।
कॉजपा का गठन मई में एक सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुआ था। बाद में इस संगठन ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले में ‘जेन-जी’ के प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को वकील राजा चौधरी की याचिका पर संज्ञान लिया, जिन्होंने मामले में खुद अपना पक्ष रखा।
याचिका में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) को भी मामले में प्रतिवादी बनाया गया है।
इस याचिका में एक बड़ा मुद्दा भी उठाया गया है, जो अदालती कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल, ट्रेडमार्क के रूप में इस्तेमाल और उनसे धन कमाने के मकसद से उन्हें प्रसारित करने से जुड़ा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 15 मई की अदालत की कार्यवाही के दौरान की कुछ टिप्पणियों को चुनिंदा तरीके से संपादित किया गया और बाद में उन्हें मीम, वीडियो, मिमिक्री, राजनीतिक प्रचार तथा अन्य व्यावसायिक सामग्री के रूप में प्रसारित किया गया।
वकील ने दलील दी कि इस मामले की गहन जांच की जरूरत है कि प्रधान न्यायाधीश द्वारा एक पूरी तरह अलग न्यायिक संदर्भ में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘‘कॉकरोच’’ को किस तरह खास संदर्भ में इस्तेमाल किया गया और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने एवं संस्थागत अखंडता को नुकसान पहुंचाने के मकसद से उनकी टिप्पणी को संपादित कर व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया गया।
याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे अदालत में की गई मौखिक टिप्पणियों या रूपकों के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल, उन पर ट्रेडमार्क का दावा करने, उनसे आर्थिक लाभ कमाने या उनका बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग करने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं की जांच करें और कानून के अनुसार कार्रवाई करें।
याचिका में कहा गया है कि संवैधानिक दायरे में रहकर निष्पक्ष आलोचना करना, लोकतांत्रिक असहमति व्यक्त करना, व्यंग्य और अभिव्यक्ति की आजादी की इजाजत है, बशर्ते इससे संस्था की गरिमा को ठेस न पहुंचे।
इसमें उस संदर्भ का जिक्र किया गया है जिसमें प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने 15 मई को ये टिप्पणियां की थीं।
याचिका में कहा गया है कि संजय दुबे की एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने फर्जी वकीलों के संदर्भ में ‘‘कॉकरोच’’ वाली टिप्पणी की थी। उन्होंने अदालत की प्रक्रिया के दुरुपयोग, पेशेवर मानकों में गिरावट और इससे न्यायपालिका जैसी संस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताते हुए यह टिप्पणी की थी।
इस नयी याचिका में कहा गया है कि 15 मई के बाद से न्यायिक कार्यवाही के दौरान की कुछ टिप्पणियों को चुनिंदा तरीके से संपादित कर बनाए गए वीडियो क्लिप की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।याचिका में कहा गया है कि कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियों और उनके विकृत स्वरूप को मीम में बदल दिया गया है तथा आर्थिक लाभ के मकसद से उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है।
