दिल्ली में मार्च के दौरान शिवकुमार को ‘धक्का’ दिए जाने को लेकर भाजपा ने राहुल पर निशाना साधा

राष्ट्रीय
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बेंगलुरु: 13 अक्टूबर (ए) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और 12 अक्टूबर को नयी दिल्ली में विपक्ष के ‘लोकतंत्र मार्च’ के दौरान मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को कथित तौर पर धक्का देकर पीछे किए जाने की घटना को पूरे राज्य का ‘‘अपमान’’ करार दिया।

घटना का एक वीडियो साझा करते हुए भाजपा ने कहा कि कन्नड़ भाषी लोग राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को कभी माफ नहीं करेंगे।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ चलने की कोशिश कर रहे मुख्यमंत्री शिवकुमार को भीड़ के बीच धक्का देकर पीछे कर दिया गया।

कर्नाटक भाजपा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “राहुल गांधी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को – जो 7 करोड़ कन्नड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं – दिल्ली बुलाया और उनका अपमान किया। उन्हें राहुल गांधी के पास जाने से रोकना और इस तरह अमानवीय तरीके से दूर धकेलना, कांग्रेस पार्टी की ओर से पूरे कर्नाटक राज्य का भारी अपमान है। कन्नड़ लोग राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को कभी माफ नहीं करेंगे।”

भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने दिल्ली में विपक्ष की ओर से उच्चतम न्यायालय तक निकाले गए मार्च की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “गुंडागर्दी, अहंकार और अंधभक्ति” का खुला प्रदर्शन बताया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से रचा गया राजनीतिक तमाशा संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति “तिरस्कार का चौंकाने वाला प्रदर्शन” था, जिसमें न्यायपालिका को भी नहीं बख्शा गया।

विजयेंद्र ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “राहुल गांधी का मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को उनके कुर्ते से खींचकर वापस भीड़ में धकेलना हो, पार्टी कार्यकर्ताओं को कोहनी मारना हो या फिर एक महिला पत्रकार के साथ कथित हाथापाई करना हो – ये परेशान करने वाली तस्वीरें कांग्रेस नेता के अहंकार, असहिष्णुता और खुद को सबसे ऊपर समझने की सोच को साफ तौर पर दिखाती हैं। ये एक तानाशाह की खास निशानियां हैं!”

उन्होंने कहा, “राहुल गांधी के लिए कुर्सी पाने की जिद के आगे किसी भी चीज का कोई महत्व नहीं है – न तो अपनी पार्टी के नेताओं की गरिमा का, न ही चुने हुए मुख्यमंत्री के ओहदे का और न ही पत्रकारों की सुरक्षा का। ऐसा लगता है कि उनके लिए उस संवैधानिक मर्यादा का भी कोई महत्व नहीं है, जो हमारे लोकतंत्र को बनाए रखती है।”