थाना प्रभारी की हत्या के मामले में शराब तस्करी गिरोह के सरगना समेत तीन लोग हिरासत में लिए गए

इंदौर मध्य प्रदेश
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इंदौर: दो नवंबर (ए) मध्यप्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब की अंतरराज्यीय तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव के थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हत्या किए जाने के मामले में पुलिस ने शराब तस्करी गिरोह के कथित सरगना समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में मिले सुरागों के आधार पर गिरोह के सरगना से जुड़े एक व्यक्ति के नाम पर देवास के पड़ोसी हरदा जिले में संचालित शराब की तीन दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। इसके अलावा, एक सहायक जिला आबकारी अधिकारी और दो आबकारी आरक्षकों को भी निलंबित किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान राहुल जायसवाल, केरम सिंह चंगोड़ और विजय राव के रूप में की है।

उन्होंने बताया कि जायसवाल हरदा जिले के टिमरनी से गुजरात तक अवैध शराब की तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था, जबकि केरम सिंह ने शराब तस्करी के लिए चालक गजेन्द्र उर्फ अक्कू रावत को ट्रक उपलब्ध कराया था।

अधिकारियों ने बताया कि राव ने जायसवाल के लिए शराब तस्करी नेटवर्क में काम करने की बात कथित तौर पर स्वीकार की है।

उन्होंने बताया कि पुलिस के अलग-अलग दलों ने मुखबिर की इस सूचना पर नाकेबंदी की कि एक ट्रक में अवैध शराब भरकर हरदा जिले के टिमरनी से गुजरात ले जाई जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक पुलिस को संदलपुर फाटा स्थित एक ढाबे के सामने अवैध शराब से भरा ट्रक खड़ा मिला।

उन्होंने बताया,‘‘खातेगांव के थाना प्रभारी दिलीप पुरी ने चालक को वाहन से उतरकर तलाशी कराने को कहा, लेकिन चालक ने जान से मारने की नीयत से वाहन उनके ऊपर चढ़ा दिया और वहां से फरार हो गया। इस दौरान चालक ने आरक्षक सोहन जाट को भी वाहन से कुचलने का प्रयास किया जिससे वह घायल हो गए।’’

अधिकारियों ने बताया कि उपचार के दौरान पुलिस निरीक्षक पुरी की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि घटना को लेकर खातेगांव पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 103(1) (हत्या), 109(1) (हत्या का प्रयास), 121(2) (लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए गंभीर चोट पहुंचाना) और 3(5) (साझा इरादे से किया गया अपराध) तथा आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) (शराब तस्करी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला है कि शराब के ठेकों में बड़वानी जिले के पाटेन्द्र जायसवाल की 10 प्रतिशत और राहुल जायसवाल, मनीष जायसवाल तथा मोहिन जायसवाल की 30-30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरगना राहुल जायसवाल हरदा जिले की तीन लाइसेंसी दुकानों से शराब की तस्करी करने वाले नेटवर्क का संचालन करता था। इस कारोबार से मिलने वाली पूरी रकम उसके पास जमा की जाती थी और बाद में वह अन्य साझेदारों को उनका हिस्सा देता था।’’

अधिकारियों ने बताया कि जांच में शराब तस्करी नेटवर्क को लेकर मिले सुरागों के आधार पर पांच जिलों में पुलिस की दबिश जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।

उन्होंने बताया कि मामले में फरार हरेक आरोपी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।

हरदा के जिला आबकारी अधिकारी सुनील भोजने ने कहा, ‘‘देवास की घटना के बाद लाइसेंसी पाटेन्द्र जायसवाल के नाम से संचालित शराब की तीनों दुकानों की जांच की गई। जांच के बाद तीनों दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।’’

उन्होंने बताया कि टिमरनी क्षेत्र के प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी और उसके अधीनस्थ दो आबकारी आरक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।