नयी दिल्ली: दो नवंबर (ए) दिल्ली उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की वजह से प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को बर्खास्त करने के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन के आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी ने बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती देने वाली अकोइजम की याचिका पर विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया और मामले को जनवरी में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद अकोइजम जेएनयू के समाजिक विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे।
खबरों के मुताबिक मई में कम से कम 11 छात्राओं ने प्रोफेसर अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराईं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अकोइजम ने छात्राओं को बैठक करने के बहाने परिसर स्थित अपने आवास पर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने कक्षा में अश्लील और अनुचित टिप्पणियां कीं।
जेएनयू प्रशासन ने नौ अक्टूबर को यौन उत्पीड़न की शिकायतों की वजह से अकोइजम को बर्खास्त कर दिया।
विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित द्वारा हस्ताक्षरित बर्खास्तगी आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति ने पूरे प्रकरण की जांच की और अपने निष्कर्षों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।
कांग्रेस सांसद ने स्वयं पर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है।
